भाप्रसंबें की शब्दचिह्न (लोगो) के साथ सुदृढ़ ब्रांड की पहचान है, जोकि अति अनुस्मरणीय है । सूर्य चिह्न की अभिकल्पना नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद द्वारा की गई है और इसका प्रयोग 1994 से किया जा रहा है ।
वर्तमान शब्दचिह्न की संकल्पना संस्कृत श्लोक की एक पंक्ति पर आधारित है, जोकि भाप्रसंबें का आदर्श-वाक्य बन गया है : तेजस्वि नावधीतमस्तु । यह पंक्ति कई उपनिषदों की शांति प्रार्थना से व्युत्पन्न है, जिसका अनुवाद है : हमारा (शिक्षक एवं शिष्य) अध्ययन दीप्तिमान रहे ।
ऊँ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु
सह वीर्यं कर्वावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु
मा विद्विषावहै ।।
ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।।
ईश्वर हमारी रक्षा करे और साथ-साथ हमारा पालन करे । हम लोग अपने मानसिक बल की शक्ति को मानवता की भलाई के लिए उन्नत करें । हमारा पठन-पाठन तेजस्वी एवं आनन्दमय हो और उद्देश्य से सम्पन्न हो । हम लोग आपस में कभी द्वेष न करें । तीनों लोकों में शांति और सद्भावना हो ।
तैत्रेय उपनिषद से शांति मंत्र


